तुलसीपुर में किसकी होगी जीत? समर्थकों ने बना रक्खे हैं अपने समीकरण..

उत्तर प्रदेश में यूँ तो सभी जगह चुनाव के नतीजों को लेकर संभावनाएँ बताई जा रही हैं लेकिन बलरामपुर की तुलसीपुर सीट पर जिस तरह की बेचैनी लोगों में है उसका लेवल कुछ अलग ही है. तुलसीपुर सीट पर कौन चुनाव जीत रहा है इसको लेकर चर्चाएँ हर गली, चौराहे और घर में हो रही हैं. अलग-अलग समीकरण घर बैठकर लोग लगा रहे हैं और गणित किसके पक्ष में इशारा कर रही है ये सब पता लगाया जा रहा है.

तुलसीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के कैलाश नाथ शुक्ला, समाजवादी पार्टी के अब्दुल मशहूद ख़ान, निर्दलीय ज़ेबा रिज़वान, बसपा के भुवन प्रताप सिंह और कांग्रेस के दीपांकर सिंह मैदान में हैं. सभी के समर्थक यूँ तो जीत का दावा कर रहे हैं लेकिन हर प्रत्याशी का समर्थक कुछ न कुछ शंका में भी है. तुलसीपुर के चौराहों पर इस समय किसी और विषय की कोई चर्चा नहीं है बस इसी बात की चर्चा है कि तुलसीपुर से कौन चुनाव जीत रहा है.

हालत ये है कि चुनावी आँकड़ों को समझाते बुझाते लोगों में आपस में तेज़-तर्रार बहसबाज़ी भी हो जा रही है. तुलसीपुर सीट से कौन विधायक बनेगा इसको लेकर बहुत से लोग कहते हैं कि भाजपा प्रत्याशी कैलाश नाथ शुक्ला मज़बूत हैं तो कुछ कहते हैं कि सपा के अब्दुल मशहूद ख़ान अंत में विजेता साबित होंगे. वहीं ज़ेबा रिज़वान समर्थकों का कहना है कि इस बार उनकी नेता को जीत मिलेगी. मुख्य मुक़ाबला इन्हीं तीन के बीच है वैसे..

चलिए समझते हैं कि तीनों को जिताने वाले लोग क्या क्या तर्क दे रहे हैं- कैलाश नाथ शुक्ला के समर्थक कहते हैं कि जीत तो उन्हीं के प्रत्याशी की होगी क्यूँकि जो भाजपा विरोधी वोट है वो सपा और निर्दलीय प्रत्याशी ज़ेबा में बंट रहा है. ज़ेबा द्वारा अच्छा चुनाव लड़ने की वजह से मशहूद की स्थिति कमज़ोर हो गई है. भाजपा समर्थक साथ ही कहते हैं कि केंद्र सरकार द्वारा मुफ़्त राशन बाँटे जाने की स्कीम ने भी तुलसीपुर में भाजपा के लिए अच्छा माहौल बनाया है.

वहीं सपा के अब्दुल मशहूद ख़ान को जिताने वाले लोगों का कहना ये है कि सपा का कोर वोट उनके पास लौट आया है. इसके अतिरिक्त उन्हें राजेश्वर मिश्रा जैसे क़द्दावर नेता का सपोर्ट मिलने से भी फ़ायदा हुआ है. मशहूद को आँकड़ों-समीकरणों में जीत देने वालों का कहना है कि निर्दलीय ज़ेबा रिज़वान बहुत अधिक वोट काटने में नाकाम सिद्ध हुई हैं. इसके अतिरिक्त भाजपा सरकार से लोगों की नाराज़गी ने भी सपा के पक्ष में माहौल बनाया है. सपा समर्थक मानते हैं कि भाजपा विरोधी वोट ने खुलकर उन्हें वोट दिया है क्यूँकि सभी को ये मालूम है कि भाजपा का मुक़ाबला सपा ही कर सकती है.

इसके बाद अगर बात करें ज़ेबा रिज़वान की, तो वो लोग जो ये दावा कर रहे हैं कि ज़ेबा रिज़वान चुनाव जीत रही हैं उनका तर्क ये है कि ज़ेबा को सहानुभूति मिल रही है. ज़ेबा जेल में हैं और एक महिला हैं. इस नाते उन्हें सहानुभूति मिल रही है. ज़ेबा के समर्थक मानते हैं कि ज़ेबा को उनके पिता रिज़वान ज़हीर के पुराने वोट बेस से भी फ़ायदा मिल रहा है. ज़ेबा समर्थक साथ ही ये भी कह रहे हैं कि चूंकि सपा प्रत्याशी ने कमज़ोर चुनाव लड़ा है, इसलिए ज़ेबा चुनाव जीतेंगी.

किस पक्ष का दावा ठीक है ये कल ही पता चलेगा. कल उत्तर प्रदेश चुनाव के नतीजे आ जाएँगे, ऐसे में कल तक का इंतज़ार तो तुलसीपुर वालों को भी करना ही पड़ेगा. हमारे साथ बने रहिए, धन्यवाद..

Leave a Reply

Your email address will not be published.