ख़ासे लम्बे इंतज़ार के बाद मंगलवार की शाम समाजवादी पार्टी ने इस बात की सूचना दे दी कि बलरामपुर जनपद में पड़ने वाले तुलसीपुर विधानसभा में उनका उम्मीदवार कौन होगा. हालाँकि नाम को लेकर आज दोपहर तक confusion देखने को मिला. हमने आपको कल रात ही बता दिया था कि टिकट मसूद आलम ख़ान को नहीं बल्कि अब्दुल मशहूद ख़ान को मिला है. लिस्ट में मसूद आलम नाम होने की वजह से बहुत से लोगों को लगा ये कैसरगंज वाले नेता तो नहीं हैं.

मशहूद ख़ान को टिकट मिलने के बाद उनके समर्थकों में उत्साह देखने को मिला. वहीं इसी सीट से सपा के टिकट की आस लगाए बैठे ज़ेबा रिज़वान और उनके पिता रिज़वान ज़हीर की ओर से ख़बर है कि वो चुनाव लड़ेंगे. पहले ख़बर ये थी कि ज़ेबा ही मशहूद के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगी लेकिन अब उनके क़रीबी सूत्र बता रहे हैं कि ज़ेबा नहीं बल्कि पूर्व सांसद रिज़वान ज़हीर ही मशहूद का सामना करेंगे.

सपा से टिकट न मिल पाने के बाद रिज़वान ज़हीर ने बहुजन समाज पार्टी से संपर्क किया है. बसपा पहले ही इस सीट से प्रत्याशी की घोषणा कर चुकी है इसलिए अभी तक इस बातचीत का नतीजा नहीं सामने आया है. वहीं समर्थकों का दावा है कि रिज़वान निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरेंगे.

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो रिज़वान के चुनावी मैदान में उतरने से ल’ड़ाई त्रिकोणीय हो सकती है. सपा ने यहाँ से अब्दुल मशहूद ख़ान तो भाजपा ने यहाँ से मौजूदा विधायक कैलाश नाथ शुक्ला को टिकट दिया है. विश्लेषक ये भी मानते हैं कि रिज़वान के लिए जेल में रहते हुए चुनाव को मैनेज करना आसान नहीं है.

उल्लेखनीय है कि रिज़वान ज़हीर, उनकी बेटी ज़ेबा रिज़वान और दामाद रमीज़ फ़िलहाल जेल में हैं. उन्हें सपा नेता फ़िरोज़ पप्पू की हत्या में शामिल होने के इलज़ाम में गिरफ़्तार किया गया है. जनवरी माह के शुरुआत में फ़िरोज़ पप्पू की बदमाशों ने हत्या कर दी थी. फ़िरोज़ पप्पू भी सपा से टिकट के दावेदार माने जा रहे थे. उनकी हत्या ने विधानसभा सीट के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल दिए हैं.