Azamgarh : बात हो आज़मगढ़ की और हो वो भी आम बात तो कैसे हो सकता है आज़मगढ़ बिंद्रा बाजार के पास एक गांव है मखदूमपुर जो किसी ज़माने में किसी और वजह से मशहूर थे लेकिन अब इस मुबारक काम की वजह से मशहूर हुआ है ।
हाफिज अबुल बशर की बेटी ने ऐसा कारनामा किया जो भी सुनता है ज़बान से बैशाखता निकलत है सुभानअल्लाह।

उनकी बेटी उम्मे हनीफ़ा ने एक नही बल्कि कई कारनामा किया कहते हैं ना जिसको अल्लाह नवाज़ते हैं तो ऐसे ही नवाज़ते हैं उम्मे हनीफा ने सिर्फ 9 साल को उम्र में हाफिज क़ुरान बनी और 18 साल की उम्र में आलिमा इस वक़्त आखरी साल में हैं अब बात करते हैं असल मामले की आपने औरंगजेब बादशाह के बारे में सुना होगा वह हाथ से कुरान लिखकर और टोपी सिल कर कर अपना गुजारा करते थे आज के वक्त में जिस वक्त मोबाइल कंप्यूटर और साइंस का दौर है उस वक़्त में आज़मगढ़ की उम्मे हनीफा ने सिर्फ साढ़े चार माह में अपने हाथ से क़ुरान करीम लिख कर इतिहास रच दिया।

आप तस्वीर में देख सकते हैं माशाअल्लाह कैसी लिखावट जिसको देखने के बाद अच्छे अच्छे कातिब हैरान हो जाएंगे यही नही बल्कि नक़्श निगारी भी बहुत ही प्यारे अंदाज़ में की गई है अल्लाह और मोहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम के 99 नाम भी लिखी हैं फूल पत्ती की कशीदाकारी ऐसी हुई है देखने के बाद दिल खुश हो जाये ।

जब उम्मे हनीफा से पूछा गया कि आपको ये जज्बा कैसे पैदा हुआ तो उन्होंने कहा कि वह मोबाइल में एक वीडियो देख रही थी जिसमें एक औरत हाथ से कुरान करीम लिख रही थी उसको देखकर मेरे अंदर भी जज्बा पैदा हुआ जब यह औरत लिख सकती है तो मैं क्यों नहीं उसी वक्त अपने वालिद सहाब से फरमाइश की कि मुझे कुरान करीम लिखना है फिर किया था उनके वालिद भी लिखने की जो भी ज़रूरत थी उसको पूरा कर दिये और फिर उम्मे हनीफा ने वो कारनामा किया जो भी सुनता तारीफ किये बगैर नही रह सका ।

 

जब उनके पिता हाफिज अबुल बशर से पूछा गया कि आपको कैसा लग रहा है वो जज़्बात को काबू में रखते हुए अपनी डबडबाई आंखों में आंसू लिये कहा कि इतनी खुशी जिसको बयान नहीं किया जा सकता वैसे अल्लाह ने हाफिज अबुल बशर को अपने दीन की खिदमत के लिये चुन लिया उनका पूरे घर का तालीमी माहौल है उनके चार बेटी और 5 बेटे हाफिज क़ुरान और कुछ आलिम और आलिमा भी हैं ।

 

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