लखनऊ: उत्तर प्रदेश में इस समय चुनाव का माहौल है और चूंकि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है. यहाँ मुख्य लड़ाई सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के बीच है. भाजपा और सपा के बीच माहौल कुछ इस तरह का बन गया है कि कांग्रेस और बसपा जैसी पार्टियाँ लगभग न के बराबर नज़र आ रही हैं.

सपा की स्थिति मज़बूत होती देख भाजपा ने भी बाक़ी पार्टियों पर हमले करना बंद कर दिया है और सपा से मिल रही खुली चुनौती में कैसे मुक़ाबला करे ये सोच रही है. सपा और भाजपा के बीच इस कड़ी लड़ाई में दोनों पार्टियां पुरज़ोर कोशिश कर रही हैं कि किसी तरह की कोई कमी न रहने पाए. इसीलिए समाजवादी पार्टी कोशिश कर रही है कि उसके वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान जेल से बाहर आकर चुनावी प्रचार में भाग लें.

इसी सिलसिले में समाजवादी पार्टी के सांंसद आजम खान को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने यतीमखाना और डूंगरपुर प्रकरण से जुड़े पांच मामलों में उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है. इसके बाद भी उनकी रिहाई अभी नहीं हो सकेगी, क्योंकि अन्य मामलों में जमानत होना बाकी है. सपा सांसद आजम खान की गंज और कोतवाली थाने में दर्ज मुकदमों में जमानत पहले में स्वीकार की जा चुकी है, लेकिन विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा कुछ धाराएं बढ़ाई और घटाई गईं थी, जिसमें उनकी जमानत होनी बाकी थी. कोर्ट ने आजम खान को पांच मामलों में जमानत दी है.

यतीमखाना व डूंगरपुर प्रकरण में दर्ज मामलों में पुलिस ने अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल की थी जिसमे कुछ धाराएं बढ़ाई गई थी. धारा 120B, 395 ओर 304 धारा में ज़मानत मिली है. उन पर आरोप था कि आपराधिक षड़यंत्र के तहत यतीमखाने में हुई घटना आजम खान के इशारे पर की गई थी. इसके साथ ही लूटपाट भी की गई थी. जबकि, गंज थाने में दर्ज मुकदमों में आरोप था कि आजम के इशारे पर उनके मकान तोड़े गए थे और मारपीट कर लूटपाट की गई.