उत्तर प्रदेश चुनाव के नतीजे आ चुके हैं और अब सरकार भी बन चुकी है. हालाँकि आँकड़ों के आने का सिलसिला जारी है. इसी सिलसिले में कुछ और आँकड़े सामने आए हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस बार चुनाव जीतने के लिए प्रत्याशियों को अधिक वोटों की ज़रूरत पड़ी. 2017 विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार 43% वोट पाकर जीत गए थे लेकिन इस बार 47% वोट हासिल करने पर ही अक्सर जीत हुई.

292 प्रत्याशी तो ऐसे रहे जिनको 50% से कम वोट मिला लेकिन वो जीत गए जबकि 111 प्रत्याशी ऐसे रहे जिन्हें 50% या उससे ज़्यादा वोट मिला. असल में इस बार के चुनाव में बसपा कमज़ोर पड़ गई और कांग्रेस प्रत्याशी भी अधिकतर जगह अपनी ज़मानत नहीं बचा सके. ऐसे में मुक़ाबला भाजपा और सपा के बीच सीधा हो गया.

कई सीटों पर लड़ाई इन दोनों दलों में कुछ इस तरह रही कि बाक़ी दलों के प्रत्याशी 5% वोट पाने के लिए भी जूझते नज़र आए.इस तरह के आंकड़े तो पहले ही आ चुके हैं कि कई सीटों पर सपा और भाजपा में जीत हार का अंतर कुछ सौ या कुछ हज़ार वोटों तक ही था. फिर भी तीन ऐसी सीटें ज़रूर रहीं जहाँ पर जीते हुए प्रत्याशी को वोट तुलनात्मक स्तर पर कम ही मिले.

जिन तीन विधायकों को कम वोटों पर जीत मिल गई उनमें दो सपा और एक भाजपा का है. सपा विधायक विनोद चतुर्वेदी को काल्पी से जीत हासिल हुई. उन्हें महज़ 29.48% वोट मिले, ख़लीलाबाद से भाजपा के अंकुर तिवारी को 30.36% वोट मिले वहीं सपा के देवेन्द्र प्रताप सिंह को सरेनी में 30.53% मिले और वो जीत गए.

चलते चलते बताते चलें कि सबसे बम्पर जीत किस प्रत्याशी को मिली. देश के रक्षा मंत्री और भाजपा के बड़े नेता राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह ने नॉएडा से बहुत बड़ी जीत हासिल की. राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को कुल वोट का 76.16% मिला.