पश्चिम बंगाल में भाजपा जिस तरह से उपचुनाव हारी है उसके बाद पार्टी में मतभेद खुले तौर पर नज़र आ रहे हैं। बंगाल भाजपा के नेता ही अब पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं।

असल में इसका कारण है कि पार्टी बालीगंज विधानसभा सीट पर ज़रा भी मुक़ाबला नहीं कर सकी और सीपीआई(एम) और तृणमूल की सीधी लड़ाई में तीसरे स्थान पर पहुँच गई।

आसनसोल लोकसभा सीट पर भी भाजपा प्रत्याशी को बुरी हार मिली। यहाँ तृणमूल के टिकट पर शत्रुघन सिन्हा ने बड़ी जीत हासिल की। यहाँ बस एक ग़नीमत ये रही कि भाजपा दूसरे नम्बर पर रही।

इन दो सीटों पर बड़ी हार के बाद सवाल उठने लगा है कि बंगाल भाजपा में जो कुछ दम था वो ममता बनर्जी के सामने पूरी तरह निकल चुका है।

बालीगंज में जिस तरह सीपीआई(एम) ने अच्छी परफॉरमेंस की, उससे लगता है कि जल्द ही सीपीआई(एम) अपनी खोई जगह पाने के लिए पूरी ताक़त लगा देगी। पार्टी ने अपनी रणनीति में भी कई बदलाव किए हैं। इस सब को देखते हुए भाजपा नेताओं की चिंता बंगाल में बढ़ गई है।

बंगाल भाजपा के बड़े नेता सौमित्र ख़ान तो खुलेआम पार्टी को दोष दे ही रहे हैं वहीं अब भाजपा के विधायक गौरी शंकर घोष ने इस्तीफ़ा दे दिया है। मुर्शिदाबाद से विधायक गौरी शंकर घोष ने स्टेट कमिटी के सेक्रेटरी पद से इस्तीफ़ा दे दिया।

ऐसा माना जा रहा है कि बालीगंज विधानसभा चुनाव के नतीजों ने बंगाल भाजपा को हताश किया है। केंद्रीय नेतृत्व भी इस हार पर चुप्पी साधे बैठा है, इससे कार्यकर्ताओं में जो निराशा पैदा हुई है वो मज़बूत हो रही है।

बंगाल में भाजपा का जो हाल हुआ है उससे 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारियों को भी झटका लगा है। बंगाल के अलावा बिहार में भी भाजपा को बोचहां विधानसभा सीट पर करारी शिकस्त मिली।

बिहार में भाजपा का कोर भूमिहार वोट भी राजद में चला गया। ये बिहार भाजपा के लिए बड़ी चिंता पैदा कर रहा है। हाल ही में पाँच राज्य विधानसभा चुनाव में से 4 जीतने वाली भाजपा के लिए समीकरण बहुत तेज़ी से बदल रहे हैं।