UP के इस ज़िले में कचरे की गाड़ी में मिले बैलेट पेपर, DM ने मानी ग़लती लेकिन अब मामला…

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वोटिंग समाप्त होने के बाद EVM और पोस्टल बैलेट्स की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. कल कई शहरों से ऐसे मामले आए जिनके बाद समाजवादी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए. कई जगह पर EVM के मूवमेंट को लेकर लापरवाही की ख़बरें सुनने को मिलीं.

समाजवादी पार्टी और सुभासपा नेताओं ने लाइव वीडियो चलाकर दिखाया कि किस तरह से EVM से लदी ट्रक बिना किसी सुरक्षा के मूव हो रही हैं. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव में गड़बड़ी करने की कोशिश में है और मतगणना में कैसे हेर-फेर हो इसकी सारी जुगत चल रही है. सबसे गंभीर मामला बरेली में देखने को मिला. बरेली में मतगणना स्थल के बाहर कूड़े की गाड़ी में बैलेट पेपर से भरे तीन संदूक़ मिले.

ये ख़बर बहुत तेज़ी से वायरल हुई और सपा समर्थक बड़ी संख्या में मौक़े पर पहुँच गए. इसके बाद ज़ोरदार हंगामा हुआ. कई थानों की पुलिस भी मौक़े पर पहुँची और मामला शांत कराने की कोशिश होने लगी. ये मामला बरेली के परसा-खेड़ा स्थित वेयर हाउस का है. पूरे राज्य के साथ यहाँ भी 10 मार्च को वोटों की गिनती होनी है.

बहेड़ी से एक कूड़े वाली गाड़ी आयी, इस गाड़ी को आता देख वहाँ पहले से मौजूद सपा कार्यकर्ताओं ने इसको चेक करने की माँग की और जैसे ही चेक किया इसमें बैलेट पेपर से भरे तीन संदूक़ थे. सपा कार्यकर्ताओं द्वारा जैसे ही तीन संदूक़ देख लिए गए प्रशासन के हाथ-पाँव फूल गए. अधिकारी इधर उधर के तर्क देने लगे लेकिन मामला बहुत बढ़ गया.

कूड़े की गाड़ी में बैलेट पेपर मिलने की सूचना के साथ ही सपा के बड़े नेता भी मौक़े पर पहुँच गए.सपा के ज़िलाध्यक्ष शिव चरण कश्यप, महानगर अध्यक्ष शमीम खान सुल्तानी, जिला महासचिव सतेंद्र सिंह यादव, पूर्व मंत्री व भोजीपुरा से प्रत्यासी शहजिल इस्लाम, पूर्व मंत्री व बहेड़ी से प्रत्यासी अताउर रहमान, शहर प्रत्यासी राजेश अग्रवाल समेत सैकड़ों की संख्या में समाजवादी पार्टी के नेता मौक़े पर पहुँच गए और जमकर नारेबाज़ी होने लगी.

पूर्व मंत्री व भोजीपुरा से प्रत्यासही शहजिल इस्लाम ने मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की है. सपा ने इसे भारतीय जनता पार्टी की साज़िश बताया है. इस पूरे मामले में डीएम शिवकांत द्वेवेदी ने माना है कि प्रशासन की ओर से ग़लती हुई है. उन्होंने कहा कि आरओ की ग़लती थी. उसने चुनाव से जुड़ी सामग्री कुड़े की गाड़ी में भेज दी थी. इसी बात को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति की थी. लेकिन अब उनको बुलाकर बात हो गई है और अब किसी तरह की परेशानी नही हैं. वहीं इस प्रकरण में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.

वहीं इस पूरे मामले में पूर्व मंत्री और सपा के बहेड़ी से प्रत्याशी अता उर रहमान का कहना है कि हमें पहले से ही सरकार और प्रशासन पर भरोसा नहीं है जिस वजह से हमने यहां पर सपा नेताओं की ड्यूटी लगा रखी है. इसके अलावा प्रशासन ने भी कैमरे लगवाए हैं और हमने भी कैमरे लगवाए हैं.

आपको बता दें कि यूँ तो अब चुनाव EVM से होता है लेकिन किसी ड्यूटी में लगे सरकारी कर्मचारी, बुज़ुर्ग और दिव्यांग लोगों को बैलेट पेपर से वोट डालने की अनुमति होती है. बिहार विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर हार-जीत का अंतर बैलेट पेपर की गिनती से ही तय हुआ था. बिहार में NDA 125 सीटें जीती थी जबकि राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने यहाँ 110 सीटें जीती थीं. विश्लेषक मानते हैं कि 20 से अधिक सीटों पर फ़ैसला बैलेट पेपर की गिनती के बाद हुआ.

इस पर बिहार राजद के नेताओं ने आरोप लगाया कि जिन सीटों पर राजद या सहयोगी जीत रहे थे उन पर बैलेट पेपर को फिर से गिन कर कई बैलेट्स को अवैध बता दिया गया और उनकी कुछ वोटों से हार हो गई और वहीं जिन पर राजद और सहयोगी हार रहे थे वहाँ बैलेट पेपर को दुबारा गिना ही नहीं गया. बिहार में हुए घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश में सपा ने पहले से ही तैयारी करके रखी है.

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