उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं. देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में देश और राज्य के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय यानी मुस्लिम समुदाय की क्या स्थिति रही इसको लेकर बात करते हैं. मुस्लिम समुदाय को राजनीतिक तौर पर एक सक्रिय समाज के बतौर जाना जाता है. ऐसी आम धारणा है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों का पोलिंग प्रतिशत अधिक होता है.

हालाँकि फिर भी ये बात अक्सर उठती रही है कि समुदाय को उसकी जनसंख्या प्रतिशत के मुताबिक़ विधानसभा या लोकसभा सीटों पर कामयाबी नहीं मिलती. इसके बहुत से राजनीतिक कारण हो सकते हैं लेकिन हम यहाँ बात करने जा रहे हैं उत्तर प्रदेश में कुल विधायकों में मुस्लिम विधायकों की संख्या को लेकर.

हमारी जानकारी के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश में कुल 37 विधायक मुस्लिम धर्म को मानते हैं. 2022 विधानसभा चुनाव में 37 विधायक जीतकर आए, ये आँकड़ा 2017 की तुलना में बेहतर है क्यूँकि 2017 में इस समुदाय के 23 ही विधायक चुन कर आए थे. इनमें से कुछ ऐसे नाम भी हैं जिनकी चर्चा देश भर में होती है तो कुछ ऐसे हैं जो लोकल स्तर तक ही फ़ेमस हैं.

विधायकों की लिस्ट इस प्रकार है. रामपुर विधानसभा सीट से आज़म खान, स्वार से अब्दुल्ला आजम खान, अब्बास मुख्तार अंसारी मऊ से, कमाल अख्तर कांठ से, नाहिद हसन कैराना से, हाजी इरफान सोलंकी सिसामऊ से, इकबाल महमूद संभल से, आशु मालिक सहारनपुर से, मुहम्मद मुज्तबा फूलपुर से चुनाव जीते हैं ।

मन्नू अंसारी मुहम्मदाबाद से, जियाउद्दीन रिज़वी सिकंदरपुर से, गुलाम मोहम्मद सिवाल खास से, नवाब जान ठकुराद्वार से, अशरफ अली खान थानाभवन से, अरमान खान लखनऊ पश्चिम से, आलम बदी निज़ामाबाद से, तसलीम अहमद नजीबाबाद से, मुहम्मद नासिर मुरादाबाद रूरल से, मुहम्मद युसुफ मुरादाबाद से, रफ़ीक़ अंसारी मेरठ से, ज़ियाउर रहमान कुंदरकी से, सुल्तान बेग मीरगंज से, मुहम्मद आदिल मेरठ दक्षिण से, यासर शाह बहराइच से, महमूब अली अमरोहा से चुनाव जीते हैं ।

उमर अली खान बेहट से, शाहजिल इस्लाम भोजपुरा से, मुहम्मद फहीम बिलारी से, नसीर अहमद चमरौवा से, नईम उल हसन धामपुर से, सैयदा खातून डुमरियागंज से, नफीस अहमद गोपालपुर से, मुहम्मद हसन कानपुर कैंट से, शाहिद मंज़ूर किठौर से, अताउर रहमान ने बहेड़ी बरेली से जीत दर्ज की है

इसमें ये बात ध्यान देने वाली है कि ये सभी विधायक समाजवादी पार्टी गठबंधन के टिकट पर चुनाव जीते हैं. इसमें अधिकतर सपा के टिकट पर जीते हैं जबकि कुछ सुभासपा और रालोद के प्रत्याशी भी हैं. विश्लेषकों के मुताबिक़ मुस्लिम समुदाय ने बड़ी संख्या में सपा को वोट किया जिसका नतीजा है कि सपा के कई मुस्लिम नेता चुनाव जीतकर आए.

भाजपा के धुरंधरों को सपा ने हराया..

केशव प्रसाद मौर्या के अलावा पार्टी की मृगंका सिंह भी कैराना से चुनाव हार गई हैं. कैराना में हालाँकि सपा के नाहिद हसन के ही जीतने की उम्मीद थी लेकिन भाजपा ने यहाँ सभी बड़े नेताओं को उतार दिया था लेकिन भाजपा चुनाव नहीं जीत सकी. इस सीट के अलावा जिस सीट की सबसे अधिक चर्चा है वो है सरधाना की.

सरधाना से साम्प्रदायिक राजनीति के लिए जाने जाने वाले भाजपा नेता संगीत सोम की हार हुई है. यहाँ से सपा के अतुल प्रधान ने संगीत सोम को पटखनी दी है. अतुल प्रधान को 118573 वोट मिले जबकि संगीत सोम 100373 वोट ही पा सके. अतुल प्रधान की जीत कई मायनों में अहम् है. संगीत सोम को हराकर अतुल प्रधान ने भी अपनी हैसियत बढ़ा ली है वहीं संगीत सोम की हैसियत में गिरावट आनी तय हो गई है.

सपा की इन सीटों पर हुई जीत पार्टी को आने वाले समय में बहुत मज़बूत कर सकता है. वहीं कैराना से नाहिद हसन का जीतना और सरधाना से संगीत सोम का हारना ये साबित करता है कि साम्प्रदायिक राजनीति के दिन अब बहुत नहीं हैं.

शामली की कैराना विधानसभा को भाजपा ने प्रतिष्ठा बनाया हुआ था लेकिन यहाँ उसकी हार हुई है. यहाँ से सपा के नाहिद हसन चुनाव जीते हैं. नाहिद के मुक़ाबले भाजपा की मृगंका सिंह थीं जिन्हें 25 हज़ार से भी अधिक वोटों से हार मिली है. इस सीट पर भाजपा के कई बड़े नेताओं ने प्रचार किया था जबकि नाहिद ख़ुद जेल में हैं. उनकी बहन इकरा हसन ने प्रचार का ज़िम्मा संभाला था.