लखनऊ: पिछले कुछ समय में बहुजन समाज पार्टी की लोकप्रियता में कमी आयी है. पार्टी पिछले कई चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी है. हाल ही में उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनाव में भी पार्टी की स्थिति बेहद ख़राब निकल कर आयी. महाराष्ट्र और हरियाणा में हुए विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के खाते में कुछ ख़ास नहीं आया. पार्टी के अन्दर बड़े नेताओं की कमी दिखने लगी है.

बसपा प्रमुख मायावती की लोकप्रियता भले ही अभी भी बनी हुई है लेकिन कहीं न कहीं उनको जो समर्थन पहले मिलता था वो नहीं मिल पा रहा है. इसकी वजह है कि लोकल लेवल पर उनकी पार्टी का सन्देश पहुँचाने वाले कर्मठ लोगों की कमी हो गई है. पार्टी की चिंता ये भी है कि कोर वोटर उससे खिसक रहा है. यही वजह है कि अब पार्टी ने अपनी नीति में बदलाव किया है.

पार्टी अब एक बार फिर दलित और मुस्लिम समुदाय को एकजुट करने की कोशिश करने जा रही है. यही कारण है कि आज पार्टी ने एक बड़ा फ़ैसला लिया और सांसद दानिश अली को लोकसभा में पार्टी का नेता बना दिया. दानिश अली को पहले भी लोकसभा का नेता बनाया गया था लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया गया था.

कुछ महीने पहले ही दानिश को इस पोस्ट से हटा दिया गया था, तब पार्टी ने कहा था कि ये इसलिए है ताकि पार्टी का इंटरेस्ट बना रहे. मायावती ने इस फ़ैसले से जता दिया है कि वो अब मुस्लिम वोटर को साधने की कोशिश में हैं. २०२२ के विधानसभा चुनाव से पहले मायावती ये कोशिश करेंगी कि पार्टी एक बार फिर से खड़ी हो जाए और विधानसभा चुनाव में मुख्य मुक़ाबले में पार्टी बनी रहे.

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