उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव में नए नए ट्विस्ट आ रहे हैं। पहले बीएसपी के 7 विधायक बागी होकर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए तो अब बसपा सुप्रीमों मायावती ने सपा पर पलटवा’र कर इन विधायकों को निलं’बित कर दिया है। इन विधायकों में असलम राइनी, असलम अली, मुजतबा सिद्दीकी, हाकिम लाल बिंद, हरगोविंद भार्गव, सुषमा पटेल और वंदना सिंह का नाम शामिल है। विधायकों को निलं’बित करने के साथ ही मायावती ने सपा पर हम’ला करते हुए कहा है कि भविष्य में होने वाले एमएलसी के चुनावों में बसपा सपा के खिलाफ खड़ी रहेगी।

मायावती ने कहा कि सपा को हरा’ने के लिए बीजेपी को वोट देने के लिए तैयार है। इसके साथ ही मायावती ने लोकसभा चुनाव के दौरान हुए सपा बसपा गठबं’धन के कदम को भी गल’त बताया है। मायावती ने कहा है, “हमारी पार्टी ने कम्युनल फो’र्सेज से ल’ड़ने के लिए लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी के साथ हाथ मिलाया था। लेकिन उनकी पारिवारिक कलह के चलते वो बसपा के साथ गठबं’धन से ज्यादा कुछ हासिल नहीं कर सके। चुनाव के बाद उन्होंने हमें रिस्पां’ड करना बंद कर दिया और हमने उनसे अलग होने का फैसला किया।”
Mayawati-Akhilesh-Yogi
आगे उन्होंने कहा, “मैं ये बताना चाहती हूं कि जब हमने सपा के साथ लोकसभा चुनाव में उतरने का फैसला किया। हमने इस पर काफी मेहनत की लेकिन पहले दिन से ही हमारे गठबं’धन के सपा चीफ एससी मिश्रा से कहते रहे कि जब बसपा और सपा ने हाथ मिला ही लिया है, उन्हें जून 1995 का केस वापस ले लेना चाहिए। जब हमने लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद समाजवादी पार्टी का बर्ताव हमारी तरफ देखा तो हमें महसूस हुआ कि उनके खिलाफ 2 जून 1995 का केस वापस लेने में हमने बड़ी गल’ती कर दी है।”

मायावती बोलीं, “हमें उनके साथ हाथ नहीं मिलाना चाहिए था। इस पर हमें और गहनता से सोचना चाहिए था। हमने फैसला किया है कि यूपी में भवि’ष्य में होने वाले विधानपरिषद चुनावों में सपा प्रत्याशी को हरा’ने के लिए हम पूरी ताकत झों’केंगे, चाहे हमें बीजेपी प्रत्याशी या किसी अन्य पार्टी के प्रत्याशी को ही वोट क्यों न देना पड़े, हम देंगे।”

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