आज कल हर तरफ भाजपा के अंदर काफी ज़ायदा मतभेद देखने को मिल रहे है राजस्थान की राजनीति में भी कुछ ऐसे मतभेद नज़र आरहे है हाल ही में राजस्थान में भाजपा के खिलाफ वसुंधरा राजे ने अपना मोर्चा खोला था अब सतीश पूनिया का मोर्चा आया सामने है. सतीश पूनिया के नाम का संगठन का एक लैटर हैड साइकल मीडिया पर वायरल हो रहा है इस वायरल पत्र में जुगल किशोर शर्मा को इस मोर्चे का प्रदेश अध्यक्ष बताया गया है.

वायरल पत्र में प्रदेश प्रभारी, सचिव, मीडिया प्रभारी और उपाध्यक्ष के पदों की नियुक्तियां भी दर्शायी गई हैं. नियुक्ति-पत्र पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया की फोटो लगी है.भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने इसे सोशल मीडिया की शरारत बताते हुये इसे सिरे से खारिज किया है. उन्होंने मामले की जांच कराने के साथ ही कानूनी राय लेने की भी बात कही है. दूसरी तरफ बीजेपी में मचे इस बवाल पर अब कांग्रेस को हमलावर होने का मौका मिल गया है.

इस मोर्चे का प्रदेश अध्यक्ष जुगल किशोर शर्मा को बताया गया है. इतना ही नहीं सतीश पूनिया समर्थक मोर्चा में दो प्रदेश उपाध्यक्ष भी बनाए गए हैं. दो प्रदेश प्रभारी, एक प्रदेश सचिव और एक मीडिया प्रभारी है. प्रदेश संयोजक के रूप में विनीता चतुर्वेदी का नाम सामने आया है. इस पत्र में बाकायदा क्रमांक और दिनांक भी दिए गए हैं. यह पत्र 12 नवंबर 2020 का बताया गया है. इस वायरल पत्र में सतीश पूनिया की फोटो भी लगी हुई है. इसमें सतीश पूनिया समर्थक मोर्चा ने साल 2023 को होने वाले विधानसभा चुनाव में सतीश पूनिया को मुख्यमंत्री बनाने के उद्देश्य बताया है.

सतीश पूनिया समर्थक मोर्चे का पत्र वायरल होने के मामले में सतीश पूनिया ने अपनी ओर से दी गई सफाई में कहा कि राजनीति में काम करते हुए कई बार कई अजूबे होते हैं. उन्होंने कहा जिन्होंने मेरे नाम से समर्थक मोर्चा बनाया है वे लोग कौन हैं यह अभी पता नहीं है. वे मेरे से परिचित नहीं हैं. वे इस तरह के मोर्चों के पक्ष में भी नहीं हैं, क्योंकि पार्टी में हम लोग बड़े बैनर के नीचे काम करते हैं. मोदी जी का व्यक्तित्व, बीजेपी का झंडा और कमल का चुनाव चिन्ह अपने आप में पर्याप्त है. ऐसे में मुझे किसी भी समर्थक मंच की आवश्यकता नहीं है. समर्थक मोर्चा के नाम से जो बैनर बनाया गया है उसकी पड़ताल करवाई जा रही है. यह सोशल मीडिया की शरारत है.

राजस्थान कांग्रेस प्रभारी अजय माकन ने कहा कि भाजपा यहां पर सफल नहीं हो पाई और जब वो सफल नहीं हो पाई कांग्रेस को तोड़ने में अपने धन बल से, अपने शासन बल से तो खुद राजस्थान में भाजपा बिखर रही है. तो यह इसका सीधे-सीधे हर एक्शन का रिएक्शन होता है और जब यहां पर वे लोग खुद विफल हो गए तो उनकी अपनी पार्टी टूट रही है.

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