कोरो’नावाय’रस की इस महामा’री से पूरी दुनिया के लोग परे’शान है इस वाय’रस ने बड़े से बड़े और छोटे से छोटे लोगों को भी अपने च’पेट ने लिया है। दुनिया भर के ज़्यादातर देशों में इस वाय’रस का प्रकोप दिन बा दिन बढ़ता ही जा रहा है। भारत में भी इस वाय’रस ने लाखों लोगों को अपने च’पेट में लिया। जिसके चलते लोगों का बस एक ही सवाल था कि कब सबको इस वाय’रस से मु’क्ति मिलेगी। पहले तो इसका सवाल नहीं था लेकिन अब इसका जवाब स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञों के द्वारा दिया गया है। बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञों के दावा किया है कि भारत में ये वाय’रस मध्य सितंबर तक ख़तम हो जाएगा और लोगों को इससे मु’क्ति मिल जाएगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञों का मानना है कि जब भारत में इस संक्र’मण के मु’क्त होने वाले लोगों की संख्या संक्र’मित लेागों की संख्या के बराबर हो जाएगी तो ये वाय’रस ख’त्म हो जाएगा। साथ ही उनका मानना है कि मध्य सितंबर तक ये वाय’रस ख़तम हो जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय में डिप्टी डायरेक्टर जनरल दिलीप कुमार और दीप्ति असिस्टेंट डायरेक्टर रूपाली राय की कैलकुलेशन के मुताबिक, भारत में इस वाय’रस के मौजूदा मामलों की संख्या 2,76,583 हो गई है। वहीं इससे मरने वालों की संख्या भी 7,745 इतनी हो गई है और साथ ही बता दें कि इस से मु’क्त होने वालों की तादाद 1,35,205 हो चुकी है।

बताया जा रहा है कि उनका यह अध्ययन साइंस मैगजीन एपिडेमियोलॉजी इंटरनेशनल में छापा हुआ है।बता दें कि विशेषज्ञों ने भारत के मौजूदा हालातों का अनुमान लगाने के लिए इन दोनों विशेषज्ञ ने बैले ग’णितीय मॉडल का प्रयोग किया। बैले गणितीय मॉडल की मदद से मौजूदा मामलों की पुष्टि की जा सकती है। उनका कहना है कि बैले गणितीय मॉडल की मदद से स’क्रिय और ठीक हो चुके म’रीजों के आधा’र पर बीमा’री के समा’प्त होने का परि’णाम निकाला जाता है। उन्होंने बताया कि इस वाय’रस से संक्र’मित व्य’क्ति जब तक ही दूसरे व्य’क्ति को संक्र’मित कर सकता है जब तक की वो खुद संक्र’मित है। जब ठीक होने वाले लोगों की संख्या मौजूदा मरी’जों से ज़्यादा हो जाएगी तो ये संक्र’मण ख’त्म होने शुरू हो जाएगा।

दोनों वैज्ञानिकों ने अपने विश्लेषण में कहा है कि “भारत में महामा’री की शुरुआत 2 मार्च से हुई और तब से मामले बढ़ रहे हैं। इनके अध्ययन के मुताबिक सितंबर मध्य तक ठीक हो चुके और जान गंवा चुके लोगों की कुल संख्या सक्रिय म’रीजों के बराबर पहुंच जाएगी। इसके बाद से महामा’री का प्रको’प कम हो जाएगा। हालांकि इन गणित में मौसम और जमीनी हालात (जैसे प्रवासी मजदूरों का पलायन) भी मायने रखते हैं।”

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