कृषि बिल को लेकर पूरे देश में घमा’सान शुरू हो गया है। सभी वि’पक्षी पार्टियां मोदी सरकार द्वारा लिए इस फैसले का विरो’ध कर रहीं हैं। वि’पक्षी पार्टियां ही नहीं बल्कि भाजपा के खुद के सहयोगी भी इसके खि’लाफ आवाज़ उठा रहे हैं। जिसको देखते हुए केंद्र सरकार के 6 मंत्रियों ने मिलकर प्रेस कॉ’न्फ्रेंस की है। वहीं इस बिल पर राज्यसभा में भी काफी बहस हुई है। इस मु’द्दे पर वि’पक्ष ने वोटिंग करवाने की मांग की थी और इस बात से सभापति ने इं’कार कर दिया। भारतीय जनता पार्टी के लिए भी यह मु’द्दा काफी बड़ी चुनौ’ती बन चुकी है।

इसके कार’ण पार्टी दो गुटों में बं’ट गई है। एक तरफ कुछ विधायक इसका समर्थ’न कर रहे हैं तो कुछ इसका विरो’ध करते दिखाई दे रहे हैं। इसी के चलते केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर इस्ती’फ़ा दे चुकी हैं। वहीं रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि किसान बिल को लेकर वि’पक्ष ने जो हं’गामा किया है वह लोकतांत्रिक प्र’क्रिया के खि’लाफ है। मैं इस तरह के व्यवहार की पूरी तरह से निं’दा करता हूं। यही नहीं बल्कि इस दौरान उन्होंने इस फैसले को कृषि जगत के लिए एति’हासिक बताया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का जो वादा किया है उसमें भी हम काफी हद तक सफल हो रहे हैं।

Rajnath Singh

राजनाथ सिंह ने आगे कहा, “मैं ख़ुद किसान हूं मैं किसानों की परेशा’नियों को समझता हूँ ये सरकार भी किसानों की परेशानी को समझती है केंद्र सरकार ऐसा कोई भी क़दम नहीं उठाएगी जिससे कि किसी भी तरह से किसानों को नुकसान हो। संसदीय कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए जहां सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी बनती है वहीं विपक्ष का सहयोग भी अपे’क्षित है।” विपक्ष पर निशाना साधते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि आम किसानों के अंदर ग़लतफ़हमी करके राजनीतिक स्वार्थ को साधने की जो साजिश रची जा रही है वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए सही नहीं है।

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