नई दिल्ली/भोपाल. मध्य प्रदेश में राजनीतिक खींचतान का दौर बना हुआ है और अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है. भाजपा चाहती है कि जल्द से जल्द विश्वास मत पर वोटिंग हो लेकिन कांग्रेस सरकार इसको लेकर तब तक तैयार नहीं है जब तक उसके बा’ग़ी विधायक बेंगलुरु से भोपाल न आ जाएँ. आज इस मामले पर सुनवाई हुई.सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए बा’गी विधायकों के त्यागपत्रों के मामले में जांच की आवश्यकता है.

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से रिक्त विधानसभा सीटों पर उप चुनाव होने तक शक्ति परीक्षण स्थगित करने की मांग की.कांग्रेस ने कहा कि अगर उपचुनाव से पहले विश्वास मत पर वोटिंग हुई तो 22 विधानसभा सीटों के मतदाताओं का अपमान होगा. कांग्रेस ने न्यायालय में आरोप लगाया कि मप्र में उसके बा’गी विधायकों के इस्तीफे बलपूर्वक और डरा ध’मका कर ले जाए गये हैं. कांग्रेस ने कहा कि बा’गी विधायकों को भाजपा चार्टर्ड विमानों से ले गयी और उन्हें एक रिजार्ट में रखा गया है.

कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि भाजपा नेता होली के दिन अध्यक्ष के आवास पहुंचे और उन्हें बा’गी 19 विधायकों के इस्तीफे सौंपे, यह इस मामले में उनकी भूमिका दर्शाता है. दूसरी ओर भाजपा कोशिश में है कि किसी भी तरह से कांग्रेस को ज़्यादा वक़्त न मिले. इस मुद्दे पर भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश विधानसभा में तत्काल शक्ति परीक्षण की मांग करते हुए कहा कि कमलनाथ सरकार एक दिन भी सत्ता में नहीं रह सकती क्योंकि वह बहुमत खो चुकी है.

गौरतलब है कि कांग्रेस में अचानक ही बग़ा’वत की ख़बर आ गई. पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 10 मार्च को कांग्रेस छोड़ दी और अगले रोज़ भाजपा में शामिल हो गए. उनके साथ ही मध्यप्रदेश के 22 कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिनमें से अधिकांश सिंधिया के कट्टर समर्थक हैं. इससे प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर संकट गहरा गया है. ये सभी 22 सिंधिया समर्थक विधायक एवं पूर्व विधायक बेंगलुरु में डेरा डाले हुए हैं.

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