जितेंद्र त्यागी उर्फ वसीम रिज़वी ने की इस्लाम की तारीफ…. कहा हम न घर के रहे न घाट के, अच्छा हुआ मेरा परिवार…

September 22, 2022 by No Comments

बीबीसी हिंदी ने एक रिपोर्ट जारी की है रिपोर्ट उन लोगों के बारे में है जिन्होंने मुस्लिम धर्म छोड़कर हिं’दू धर्म अपनाया है बीबीसी का एक सवाल है हिन्दू धर्म अपना आपको क्या मिला? जिसमें कई लोगों की स्टोरी की गई है उसी में वसीम रिजवी के बारे में भी स्टोरी की गई है बीबीसी ने लिखा वसीम रिज़वी पिछले साल पाँच दिसंबर को हिन्दू धर्म अपनाकर जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी बन गए थे।

51 साल के जीवन में जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी 50 साल दो महीने इस्लाम में रहे पिछले 10 महीने से हि’न्दू हैं वह इन 10 महीनों को कैसे देखते हैं? त्यागी कहते हैं, ”सनातन में आने की चुनौ’तियों का अंदाज़ा मुझे पहले से था. यहाँ लोग अपनाते नहीं हैं. सबसे पहली दि’क़्क़त तो जा’ति और बिरादरी को लेकर होती है।

अगर आपने कोई जा’ति ले ली तब भी उस जाति के लोग आपको स्वीकार नहीं करेंगे मैंने अपने नाम में त्यागी जोड़ लिया इसका मतलब यह नहीं है कि त्यागी समाज बे’टी-रोटी का सं’बंध बना लेगा मेरा अतीत उन्हें अपनाने नहीं देगा सना’तन धर्म की ये दिक़्क़त हैं यहाँ लोग अप’नाते नहीं हैं ।

उन्होंने इस्लाम की ता’रीफ करते हुए कहा सातवीं सदी का मज़हब इस्लाम अगर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मज़हब बन गया तो इसकी कुछ ख़ूबियाँ भी हैं. जितेंद्र त्यागी कहते हैं, ”इस्लाम में घुलने मिलने का स्पेस है आपने एक बार इस्लाम स्वीकार कर लिया तो आपके अतीत से उन्हें कोई मतलब नहीं होता है।

वहाँ वैवाहिक संबंधों में समस्या नहीं होती है इस्लाम में जाति को लेकर इस तरह अपमान नहीं झे’लना होता है मैं मरते दम तक सनातन में रहूँगा लेकिन मुझे पता है कि कोई भी बेटी-रोटी का संबंध नहीं बनाएगा ऐसे में लगता है कि हम न घर के रहे न घाट के।

जितेंद्र नारायण त्यागी कहते हैं कि सनातन में आने के बाद उनका निकाह टूट गया परिवार बु’री तरह से प्रभा’वित हुआ वह कहते हैं, ”सच कहिए तो मैंने अपने जीवन में ज़’हर घो’ल लिया इसीलिए मैं पूरे परिवार के साथ सना’तन में नहीं आया था पहले मैं ख़ुद आकर देखना चाहता था अच्छा हुआ कि पूरे परिवार के साथ नहीं आया।

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