हज़रत अली से एक शख्स ने पूछा-“भाई और दोस्त में कौन ज्यादा कीमती है?” मिला ये बेहतरीन ज़वाब..

January 31, 2021 by No Comments

दोस्त और भाई में क्या फर्क होता है। आज हम इस बारे में बात करने जा रहे हैं। इस मामले में हजरत अली ने क्या फरमाया है। हजरत अली मु’सलमा’नों के चौथे खलीफा के तौर पर जाने जाते हैं। इ’स्ला’म ध’र्म में हजरत अली का मर्तबा बहुत ऊँचा है। उनके कथन पर मु’सलमा’नों ज्यादा से ज्यादा अमल किया जाता है।

किसी ने हजरत अली से पूछा. दोस्त और भाई में क्या फर्क है? हजरत अली ने फरमाया “भाई सोना है और दोस्त हीरा है” उस आदमी ने कहा “आप ने भाई को कम कीमतऔर दोस्त को ज्यादा कीमती चीज़ से क्यू त’शबी’ह दी?” तो हजरत अली ने फरमाया “सोने में दरार आ जाये तो उस को पिघला कर बिलकुल पहले जैसा बनाया जा सकता है. जब की हीरे में एक दरार भी आ जाये तो वो कभी भी पहले जैसा नही बन सकता.

जिनकी माँ नही होती है उनका- किसी ने हजरत अली रजि. से पूछा के जिनकी माँ नही होती उनके बच्चों को दुआ कौन देता है? आप फरमाया के कोई झील अगर सुख भी जाए तो मिट्टी से नमी नही जाती। इसी तरह माँ के इ’न्तेका’ल के बाद भी अपनी औलाद को दुआ देती रहती है। लिबास के बारे में हजरत अली बोले हजरत अली लिबास और आने वाले वक़्त को लेकर कहा-एक ज़माना ऐसा भी आएगा कि लोग अपने रब को भुल जाएंगे, लिबास बहुत क़ीमती पहन कर बज़ार में अकड़ कर चलेंगे और इस बात से बेखबर होंगे के उसी बाज़ार में उन का कफन मौजूद है.

अगर किसी के बारे मे जानना चाहते हो तो पता करो के वह शख्स किसके साथ उठता बैठता है इल्म की वजह से दोस्तों में इज़ाफ़ा होता है। दौलत की वजह से दु’शमनों में इज़ाफ़ा होता है.सब्र की इमान से निस्बत-सब्र को ईमान से वो ही नि’स्ब’त है जो सिर को जिस्म से है। दौलत,हुक़ूमत और मुसीबत में आदमी के अक्ल का इम्तेहान होता है कि आदमी सब्र करता है या गलत क़दम उठता है। सब्र एक ऐसी सवारी है जो सवार को अभी गिरने नहीं देती।

ऐसा बहुत कम होता है के जल्दबाज़ नुकसान न उठाये और ऐसा हो ही नही सकता के सब्र करने वाला नाक़ाम हो.सब्र–इमान की बुनियाद,सखावत (दरियादिली)–इन्सान की खूबसूरती,सच्चाई–हक की ज़बान,नर्मी कामयाबी की कुं’जी और मौ’ त–एक बेखबर साथी है।

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