कहते हैं कि शपथ ग्रहण जिस दिन होना होता है उसके पहले की रात जीती हुई पार्टी के नेता के लिए बड़ी उम्मीद वाली रात होती है. अक्सर नेता इंतज़ार करते हैं कि हो सकता है उन्हें भी पार्टी नेतृत्व की ओर से फ़ोन आए और उन्हें भी मंत्री बनने का मौक़ा मिले. असल में जो भी पार्टी चुनाव जीतती है ओ शपथ ग्रहण से पहले उन नेताओं को फ़ोन करती है जिनको उसे मंत्री बनाना होता है.

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भाजपा के चुनाव जीतने के बाद भाजपा के कई नेताओं में इस तरह की हलचल देखी गई. सभी कयास लगा रहे थे और बहुत से नेताओं के परिवार वाले दुआएं तक माँग रहे थे. मंत्री किसे बनाना है किसे नहीं ये विजेता पार्टी के नेतृत्व और ख़ुद मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है.

कुछ बड़े नेताओं को छोड़ दिया जाए तो ये बातें गुप्त रहती हैं और बस एक रोज़ पहले या कई बार उसी दिन नेता को पता चलता है कि वो मंत्री बनेंगे. 25 मार्च को उत्तर प्रदेश की नई सरकार का शपथ ग्रहण होगा. एक बार फिर योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री पद की संवैधानिक शपथ लेंगे, उनके साथ कई मंत्री भी शपथ लेंगे.

बड़े नेताओं को कौन सी ज़िम्मेदारी मिलेगी ये शपथ ग्रहण के बाद ही पता चल सकेगा. साथ ही कई नए चेहरों को भी पार्टी मंत्री बना सकती है. इसमें एक नाम जो सबसे उभर कर आ रहा है वो है दानिश आज़ाद अंसारी. दानिश मुस्लिम समाज से आते हैं और ख़बरों की मानें तो उन्हें पार्टी की ओर से फ़ोन आ चुका है.

दानिश आज़ाद को अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री बनाया जा सकता है. वहीं पिछली सरकार में मंत्री रहे मोहसिन रज़ा के नाम पर सस्पेंस बरक़रार है. हालाँकि दानिश का नाम आने के बाद मोहसिन रज़ा शायद ही मंत्री बन पाएँ. इसकी वजह भाजपा का पुराना रिकॉर्ड है. भाजपा ने इस विधानसभा चुनाव में किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया और इसके पहले भी भाजपा मुस्लिम प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाने से बचती रही है.

भाजपा नेताओं पर अक्सर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी का आरोप लगता रहा है.बात जो भी हो लेकिन ज़ाहिर है कि अब दानिश आज़ाद का मंत्री बनना लगभग तय है वहीं मोहसिन अंसारी का पत्ता कट सकता है. दानिश अंसारी लम्बे समय से भाजपा में जुड़े हुए हैं. वो भाजपा की स्टूडेंट विंग ABVP से जुड़े हुए थे. वो बलिया के रहने वाले हैं और उन्होंने लखनऊ से स्नातक पास की है.